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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 7, ISSUE 5 (2021)
विज्ञान और तकनीकी में हिन्दी
Authors
मेहनाज़ बेगम
Abstract
आधुनिक दौर विज्ञान का दौर है जिसमें मनुष्य के प्रत्येक कार्यकलाप वैज्ञानिक ढंग से ही संभव है। विज्ञान का प्रभाव मनुष्य पर स्पष्ट रूप से परिलक्षित है। आज तक विज्ञान के क्षेत्र में जिस भाषा का वर्चस्व अधिक रहा, वह है अंग्रेज़ी किन्तु इस बात में भी कोई दो राय नहीं है कि हिन्दी भी आज विज्ञान के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही है। आज कम्प्युटर, इंटरनेट आदि में हिन्दी का बखूबी प्रयोग हो रहा है। इसी तरह कई उपग्रह चैनल हिन्दी में प्रसारित कार्यक्रम पूरी दुनिया में पहुँचाते हैं। अतः नई प्रौद्योगिकी विष्वव्यापी पर आरूढ़ होकर हिन्दी आज विष्वव्यापि बन गयी है। हिन्दी साहित्य का एक बड़ा हिस्सा अब इंटरनेट पर भी उपलब्ध है। आज कुर्तिदेव के स्थान पर मंगल और यूनिकोड़ के प्रयोग से हिन्दी तकनीकी भाषा बन गई है। अतः आज हिन्दी में साहित्य समाज और राष्ट्र से सम्बंधित विभिन्न सामग्री उपलब्ध है। अंततः यह कहा जा सकता है कि विज्ञान और तकनीकी क्षेत्र में हिन्दी का विकास हुआ है लेकिन जिस स्तर पर होना चाहिए था, अभी हुआ नहीं है क्योंकि राजभाषा हिन्दी बनने के बाद भी सहयोगी भाषा के रूप में अंग्रेज़ी रही। यदि हमें वास्तविक रूप से विज्ञान एवं तकनीकी विषयों के षिक्षण का माध्यम हिन्दी भाषा को बनाना है तो हमें हिंदी के विज्ञान-लेखन का गंभीरता से विष्लेषण करना होगा और उन सभी आर्थिक, राजनीतिक एवं सांस्कृतिक कारणों का पता लगाना होगा जो इस लेखन-प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं ताकि हम उनके निराकरण के उपाय सोच सकें और प्रभावी ढंग से उन्हें कार्यान्वित भी कर सकें।
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Pages:73-75
How to cite this article:
मेहनाज़ बेगम "विज्ञान और तकनीकी में हिन्दी ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 5, 2021, Pages 73-75
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