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VOL. 7, ISSUE 6 (2021)
वर्तमान युग में मुरझाते शाश्वत मूल्य
Authors
नीलिमा, डॉ. बृजलता शर्मा
Abstract
सशक्त दार्शनिक दृष्टि, क्रियात्मक सामाजिक जीवन, मूल्योंपरक चेतना तथा वैयक्तिक सदाचार-परायण जीवन, इन तीन मुख्य आधारभूत आयामों के द्वारा व्यक्ति जीवन मूल्यों के आदर्श को प्रस्तुत करने में सफल हो सकता है। परंतु वर्तमान समय में नैतिक मूल्यों का संकट कुछ इस तरीके से गहराता जा रहा है कि उचित-अनुचित के बीच अंतर कर पाना बहुत ही कठिन जान पड़ता है । यह कठिन समस्या जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में देखने को मिलती है। उदाहरण के तौर पर धार्मिक-सांस्कृतिक व शिक्षा-संस्थानों को ही यदि हम देखें तो अतिसुक्ष्मता से चिंतन करने पर यह पाते हैं कि प्राचीनकाल में शिक्षण संस्थाओं व धार्मिक संस्थाओं को समाज में जीवन मूल्य को स्थापित करने का मुख्य आधार-तंत्र माना जाता था। वहीं आज इस बदलते परिवेश में शिक्षण संस्थान एंव धार्मिक संस्थाएं राजनीति के अखाड़े के रूप में वोट-बैंक तैयार कर रही है या फिर व्यवसायिक संस्थाएं बनती जा रही है । कोई भी धार्मिक संस्था अपने नाम से ही मनुष्य की जरूरत की वस्तुओं को बाजार में क्रय-विक्रय करने का कार्य बड़े जोरों-शोरों से करती है। अतः यह परिवर्तन इस समाज के वर्तमान चेहरे को प्रदर्शित कर रहा है।
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Pages:47-57
How to cite this article:
नीलिमा, डॉ. बृजलता शर्मा "वर्तमान युग में मुरझाते शाश्वत मूल्य ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 6, 2021, Pages 47-57
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