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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 7, ISSUE 6 (2021)
भक्तिकाल की सार्थकता
Authors
अर्चना शर्मा
Abstract
प्रस्तुत शोध-आलेख का ध्येय हिंदी साहित्येतिहास के ‘स्वर्णयुग’ अर्थात् भक्तिकाल की वर्तमान सन्दर्भों में प्रासंगिकता और सार्थकता को लिपिबद्ध करना है। भक्ति के अविरल स्रोत के कारण भक्तिकाल ने अखिल भारतीय स्तर पर सामाजिक सामंजस्य की प्रतिष्ठापना की । शोध-आलेख के माध्यम से भक्तिकाल के सामजिक, राजनैतिक, आर्थिक एवं प्रासंगिक आयामों पर सोदाहरण विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है ।
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Pages:118-119
How to cite this article:
अर्चना शर्मा "भक्तिकाल की सार्थकता". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 6, 2021, Pages 118-119

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