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VOL. 8, ISSUE 1 (2022)
राष्ट्रीय बांध सुरक्षा विधेयक 2021ः एक विहंगावलोकन
Authors
सुभाष भिमराव दोंदे
Abstract
नदी के अधिशेष जल को संग्रहित करने के लिए बांध और जलाशय एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा है; जिसका निर्माण बहुउद्देश्यीय उपयोगों जैसे पीने का पानी, कृषि सिंचाई, औद्योगिक उत्पादन, बाढ़ नियंत्रण, जल-विद्युत उत्पादन, तथा अंतर्देशीय नौवहन जैसी मानवीय जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े निवेश के साथ किया जाता है। किंतु बांधों के निर्माण में अवांछनीय सामाजिक और पर्यावरणीय लागत भी शामिल है, जिसमें जैव-विविधता से भरे जंगलों एवं उपजाऊ भूमि के बड़े हिस्से का जलमग्न होना और आदिवासियों जैसे कमजोर समुदायों का विस्थापन भी शामिल है। भारत के संघराज्यीय ढांचे के परिपेक्ष्य में लगभग 92ः बांध अंतर्राज्यीय नदी द्रोणीयों या घाटियों पर बनाये गए हैं; जिनके पानी के बटवारे को लेकर संबंधित राज्योंमें बरसों से अनसुलझे अंतर्राज्यीय नदी जल विवाद चल रहे है। बांधो की संख्या की तुलना में भारत अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बांध निर्माता है। वर्तमान में भारत में 5,745 बड़े बांध हैं, जिनमें से 293 बांध 100 साल से अधिक पुराने हैं। इसके अलावा 1,041 (25ः) बांध 50 से 100 साल पुराने हैं और 80ः बांध 25 वर्षों से अधिक साल पुराने है। आजादी के बाद से भारत में अबतक 40 बांध विफल होकर टूट चुके हैं। बांधों की विफलता से उपजने वाली आपदा की रोकथाम के लिए बांधों की निगरानी, देखभाल, संचालन या परिचालन और रखरखाव के लिये भारत में अब तक कोई कानूनी प्रावधान नही था। किन्तु संसद के दोनों सदनों में राष्ट्रीय बांध सुरक्षा विधेयक-2021 पारित हो जाने ने की वजह से सत्तर साल पुरानी यह कमी पूरी हो गयी है। प्रस्तुत अनुसन्धान लेख राष्ट्रीय बांध सुरक्षा विधेयक 2021 से जुड़े समस्त पहलुओं का समीक्षात्मक विहंगावलोकन है।
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Pages:21-25
How to cite this article:
सुभाष भिमराव दोंदे "राष्ट्रीय बांध सुरक्षा विधेयक 2021ः एक विहंगावलोकन ". International Journal of Hindi Research, Vol 8, Issue 1, 2022, Pages 21-25
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