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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 8, ISSUE 1 (2022)
विद्याभूषण डाॅ0 विश्वनाथ प्रसाद का साहित्यः लोक जीवन का लालित्य
Authors
गीता अस्थाना
Abstract
वर्तमान परिदृष्य में आम-जीवन किस प्रकार सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, धार्मिक एवं सास्कृतिक पृष्ठभूमि व परिवेष से समन्वय स्थापित कर विविध बिडम्बनाओं को आत्मसात कर संघर्ष के ताने-बाने में जीवन जीने के लिए विवश होता है, उसके प्रति संवेदनशील होना ही लोक जीवन की संपृक्ति है। डाॅ0 विष्वनाथ प्रसाद के साहित्य में व्यक्त लोक जीवन में लालित्य का प्राधान्य स्वाभाविक रूप से उनकी सौन्दर्यवादी चिन्तन दृष्टि का द्योतक है। आम-जीवन के संघर्ष के साथ-साथ जीवन के प्रति अदम्य साहस, दृढ़ आस्था एवं जीवन-जीने का आकर्षण ही एक ओर साहित्य सृजन कला को सौन्दर्य से आवेष्टित करती है तो दूसरी ओर उसे लालिव्य पूर्ण अलौकिक आनन्द में सराबोर कर ‘सत्यं-शिवं-सुन्दरं’ की परमानुभूति भी कराती है।
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Pages:40-44
How to cite this article:
गीता अस्थाना "विद्याभूषण डाॅ0 विश्वनाथ प्रसाद का साहित्यः लोक जीवन का लालित्य ". International Journal of Hindi Research, Vol 8, Issue 1, 2022, Pages 40-44

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