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VOL. 8, ISSUE 2 (2022)
रविंद्र कालिया की कहानियों की मूल संवेदना
Authors
ज्ञानी देवी गुप्ता
Abstract
रवीन्द्र कालिया की कहानियों की संवेदना के समुचित विश्लेषण के लिए यह आवश्यक है कि हम उनकी कहानियों की संवेदना से भलि-भांति परिचित हों। रवीन्द्र कालिया की कहानियों की संवेदना को हम संग्रहवार इस तरह विश्लेषित कर सकते हैं- हिन्दी में साम्प्रदायिकता को आधार बनाकर अनेक कहानियाँ लिखी गयी हैं। साम्प्रदायिकता को पंजाबी रचनाकारों ने बेहद करीब से देखा था, झेला था और महसूस किया था। इसलिए साम्प्रदायिकता को आधार बनाकर लिखने वालों में पंजाबी रचनाकारों की संख्या अधिक है। भारत में कुछ ऐसी असामाजिक विसंगतियाँ हैं जो आज भी भारतीय मानसिकता पर छायी हुई है। धर्म, जाति, लिंग एवं नस्ल के आधार पर भेदभाव करने की प्रवृत्ति आज भी समाज में विद्यमान है और जिनका प्रभाव प्रवासी भारतीयों में भी देखा जा सकता है। शीनी के डेट पर चले जाने पर रोती बिलखती अपनी माँ शील से नेहा कहती है, ‘‘वह डेट पर गयी है व्याभिचार करने नहीं।’’
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Pages:60-62
How to cite this article:
ज्ञानी देवी गुप्ता "रविंद्र कालिया की कहानियों की मूल संवेदना". International Journal of Hindi Research, Vol 8, Issue 2, 2022, Pages 60-62
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