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VOL. 8, ISSUE 4 (2022)
‘हयवदन’ और ‘सूर्य की अंतिम किरण से सूर्य की पहली किरण तक’ नाटक में स्त्री-पुरुष संबंधः एक तुलना
Authors
नवीन सिंह
Abstract
स्त्री और पुरुष समाज रूपी रथ के दो पहिये के रूप में माने जाते हैं। इनमें से किसी एक के क्षतिग्रस्त होने पर समाजरूपी रथ का संतुलन भी स्थिर नहीं बना रह सकता। समाज के अभिन्न अंग होने के कारण साहित्य में स्त्री-पुरुष संबंधों को अनादि काल से चित्रित किया जाता रहा है। दृश्य काव्य अथवा नाटक अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम रहा है। अतः आधुनिक युग के नाटकों में स्त्री-पुरुष संबंधों को विभिन्न दृष्टिकोणों से देखा-परखा गया है। हिंदी के नाटककारों में सुरेंद्र वर्मा व कन्नड़ नाटककार गिरीश कर्नाड के नाटकों में स्त्री-पुरुष संबंधों का एक विशिष्ट धरातल दिखाई देता है। प्रस्तुत आलेख में इन दोनों नाटककारों के चर्चित एवं बहुमंचित नाटक में स्त्री-पुरुष संबंधों के विभिन्न आयामों का विश्लेषण करने का प्रयास किया गया है।
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Pages:41-43
How to cite this article:
नवीन सिंह "‘हयवदन’ और ‘सूर्य की अंतिम किरण से सूर्य की पहली किरण तक’ नाटक में स्त्री-पुरुष संबंधः एक तुलना". International Journal of Hindi Research, Vol 8, Issue 4, 2022, Pages 41-43
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