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VOL. 8, ISSUE 4 (2022)
विज्ञान और हिन्दी
Authors
माया
Abstract
भाषा शब्द संस्कृत की ‘भाष्’ धातु से व्युत्पन्न है तथा इसका प्रयोग बोलने के लिए होता है। इस सन्दर्भ में महर्षि पतंजलि ने ‘पाणिनि’ रचित ‘अष्टाध्यायी’ पर लिखे ‘महाभाष्य’ में कहा भी है - ‘‘व्यक्ता वाचि वर्णा येषांत इमे व्यक्त वाचः।।’’1 मानव द्वारा अर्जित संस्कारों में भाषा एक ऐसा महत्वपूर्ण अर्जित संस्कार है, जिसे वह जन्म से प्राप्त नहीं करता, बल्कि मानव जिस किसी समुदाय में रहता है, वह उसी से भाषा को अर्जित करता है। भाषा मानव जाति के लिए नितान्त आवश्यक है। भाषा के बिना मानव समुदाय की कल्पना भी नहीं की जा सकती। भाषा के कारण ही मानव समाज का निर्माण हुआ है और मानव जाति के विकास की पृष्ठभूमि में भाषा की महत्वपूर्ण भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। भाषा ही समाज को सामाजिकता प्रदान करती है और यह भाषा विज्ञान की जननी भी है। भाषा मानव समुदाय द्वारा परस्पर विचार-विनिमय करने का सर्वोत्तम साधन है। भाषा हमें जोड़ती भी है और एक-दूसरे के समीप भी लाती है।
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Pages:44-46
How to cite this article:
माया "विज्ञान और हिन्दी". International Journal of Hindi Research, Vol 8, Issue 4, 2022, Pages 44-46
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