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VOL. 8, ISSUE 4 (2022)
स्नेह संबंधों का आधार-रामायण
Authors
ब्रजेश कुमार
Abstract
रामायण के प्रत्येक चरित्र ने समाज को चिर काल तक जीवंत शिक्षा प्रदान की है ! वह शिक्षा जो जीवन में आत्मसात हो जाती है अर्थात घुल मिल जाती है ! आज के आधुनिक मानव समुदाय को वास्तविक अर्थो में धर्म का, कर्तव्य का अर्थ बता पाना ही इस लेख का उद्देश्य है ! स्नेह संबंधों के तार ऐसे मजबूत बंधन होते है जो साथ हों तो सबसे बड़ी शक्ति बन सकते हैं अन्यथा सबसे बड़ी कमजोरी! रामायण के प्रत्येक पात्र ने संबंधों में निहित निस्वार्थ प्रेम का अनुपम उदाहरण समाज के समक्ष प्रस्तुत किया है ! संबंधों का निस्वार्थ होना सबसे उत्तम लक्षण है एक सच्चे सम्बन्ध का ! आज का युग कितना भी प्रगति क्यों नहीं कर चुका लेकिन संवेदनाये तो जीवंत हैं ही नहीं ! सामान तो कीमती हैं लेकिन व्यक्ति नहीं ! ऐसे समय में समाज की दृष्टि को इस ओर जागृत करने के उद्देश्य को लेकर प्रस्तुत विषय - स्नेह संबंधों का प्रमुख आधार - रामायण को लिया गया है !
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Pages:69-74
How to cite this article:
ब्रजेश कुमार "स्नेह संबंधों का आधार-रामायण". International Journal of Hindi Research, Vol 8, Issue 4, 2022, Pages 69-74
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