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VOL. 8, ISSUE 5 (2022)
राजेन्द्र यादव की कहानी 'खानदानी घर' का मूल्यांकन
Authors
विपिन कुमार
Abstract
राजेंद्र यादव इस कहानी के माध्यम से स्त्री जीवन के यथार्थ को चित्रित करते हैं. इस कहानी से वे उन बड़े और खानदानी घरों की भी पोल खोलते दिखाई पड़ते हैं जो तथाकथित सभ्य समाज में अपने को बड़ा इज्जतदार और सम्मानीय कहते हैं पर वास्तविक सच्चाई कुछ और ही ही. आज भी बड़े और खानदानी घरों में दीवारों और प्रदों के पीछे बहू-बेटियों के ऊपर इतना अत्याचार किया जाता है कि या तो वह इस जलालत भरी जिंदगी को अपनी नियति मानकर इसमें रहना पसंद करती हैं या फिर मरना.जो वास्तव में गलत है. पर अब हमारा समाज बदल रहा है अब हमारी बहु-बेटियां इस तरह की चीजों का विरोध कर रही हैं बल्कि आगे बढ़कर अपने अधिकारों और अपनी अश्मिता की लड़ाई स्वयं लड़ भी रही हैं.
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Pages:4-6
How to cite this article:
विपिन कुमार "राजेन्द्र यादव की कहानी 'खानदानी घर' का मूल्यांकन". International Journal of Hindi Research, Vol 8, Issue 5, 2022, Pages 4-6
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