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VOL. 8, ISSUE 5 (2022)
अमरकांत के उपन्यासों का शिल्प-विधान
Authors
सोनम शुक्ला, ज्ञानेन्द्र मणि त्रिपाठी
Abstract
“हिन्दी साहित्य के कथाकारों में अमरकांत का नाम प्रेमचंद की परंपरा के सामाजिक यथार्थवादी उपन्यासकारों में अंकित है।अपने कथ्य-विषयवस्तु के प्रभावपूर्ण सहज उद्घाटन हेतु अमरकांत ने औपन्यासिक संरचना का बखूबी उपयोग किया है।इन्होने अपनी रचनाओं में गहरी सामाजिक संबद्धता से युक्त मूल्यबोध को महत्त्व दिया इसीलिए इनके शिल्प-सौन्दर्य की अलग ख़ासियत दिखती है। अमरकांत ने संवाद-धर्मिता व लोकधर्मिता के विकास के लिए अपने उपन्यासों में भाषा तथा उसके सभी अवयवों के प्रवाहपूर्ण संयोजन तथा समन्वयन का सार्थक प्रयत्न किया है।इनके उपन्यासों में प्रयुक्त भाषा-शैली के स्वरूप की तुलना प्रेमचंद के कथा-साहित्य में प्रयुक्त हुई भाषा-शैली से की जा सकती है। जिसका मूल कारण प्रेमचंद की तरह ही अमरकांत का भी शहरी मध्यवर्ग तथा ग्राम्यांचल के सामाजिक परिवेश तथा वातावरण से गहरा जुड़ाव था। ऐसे वातावरण की स्पष्ट छाप इनके कथा-साहित्य में सर्वत्र विद्यमान है”।
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Pages:36-39
How to cite this article:
सोनम शुक्ला, ज्ञानेन्द्र मणि त्रिपाठी "अमरकांत के उपन्यासों का शिल्प-विधान". International Journal of Hindi Research, Vol 8, Issue 5, 2022, Pages 36-39
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