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VOL. 8, ISSUE 6 (2022)
भक्ति काव्यः जन आंदोलन में जन अभिव्यक्ति (विशेष संदर्भः कबीर और तुलसी)
Authors
सुरेन्द्र सिंह यादव
Abstract
इतिहासकार और साहित्येतिहासकार दोनों इस बात पर सहमत हैं कि भक्ति आंदोलन मूलतः एक जन आंदोलन था। इस आंदोलन का उद्गम भक्ति की भाव धारा के रूप में हुआ था। जैसे जैसे यह भाव धारा जन जन में व्यापक होती गयी, वैसे वैसे आंदोलन का रूप धारण कर अखिल भारतीय स्वरूप लेती चली गयी। अगर भक्ति आंदोलन जन आंदोलन है तो यह देखना दिलचस्प होगा कि इस जन आंदोलन में जन की अभिव्यक्ति किस तरह से हुई। बकौल रामविलास शर्मा, भक्ति आंदोलन के संदर्भ में, जन से तात्पर्य मूलतः किसान और कारीगर वर्ग से है। इन दोनों के साथ कभी कभी कृषि आश्रित छोटा व्यापारी वर्ग भी साथ आता रहा है। भक्ति आंदोलन कविता के क्षेत्र में मुख्यतः दो धाराओं में बहकर चला-निर्गुण और सगुण। निर्गुण काव्य की प्रतिनिधि के रूप में कबीर की कविता को और सगुण काव्य की प्रतिनिधि के रूप में तुलसी साहित्य को बेहिचक लिया जा सकता है। ये दोनों हिंदी भक्ति आंदोलन के दो छोर हैं तो भक्ति काव्य के दो पक्ष। प्रस्तुत शोध आलेख इन दोनों रचनाकारों के काव्य में उपर्युक्त तीनों-किसान, कारीगर और छोटे व्यापारी-वर्ग की अभिव्यक्ति पर केन्द्रित है।
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Pages:10-14
How to cite this article:
सुरेन्द्र सिंह यादव "भक्ति काव्यः जन आंदोलन में जन अभिव्यक्ति (विशेष संदर्भः कबीर और तुलसी)". International Journal of Hindi Research, Vol 8, Issue 6, 2022, Pages 10-14
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