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VOL. 8, ISSUE 6 (2022)
कबीर की सत्य शोधक जीवन दृष्टि के विविध आयाम
Authors
डॉ. सुरेन्द्र कुमार
Abstract
महान् व्यक्तियों का उदय युग की परिस्थितियों के बीच से होता है और ऐसे महापुरुष उन परिस्थितियों से खुद प्रभावित न होकर संघर्षरत रहते हुए अपने आचार-व्यवहार से उनको तदनुसार बदलने की सामर्थ्य रखते हैं। ऐसे ही युग पुरुषों की शृंखला की एक कड़ी सन्त कवि कबीरदास हैं। उनके विचारों और कार्यों का प्रभाव वर्तमान पर भी परिलक्षित होता है। कबीर धर्मगुरु और समाज के नेता थे लेकिन समय-समय पर विभिन्न विद्वानों ने कबीर के प्रति एकांगी दृष्टिकोण अपनाकर उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को बहुत बड़ी ठेस पहुँचाई है। कबीर तो समन्वय के साधक और मानवता के पोषक थे। कबीर में सूफीमत, वेदांत, रहस्यवाद, नारी-निंदा जैसी अनेक बातें हैं, जैसे, संसार की असारता पर जोर, मायावाद आदि का वर्णन, पर ये अनेक विकास की मंजिलें हैं। विरोधाभासों वाले व्यक्तित्व के धनी कबीर जिस युग में पैदा हुए थे, वे उस युग से बहुत आगे निकल चुके थे। वे सामाजिक व सांस्कृतिक क्रांति के नायक थे। ‘अपना मस्तक काटकर बीर हुआ कबीर’ (कबीर शब्द का पहला अक्षर ‘क’ जो मस्तक समान है, काट दिया जाए तो ‘बीर’ शब्द बचा रहता है) संत दादू दयाल की कबीर की प्रशंसा में यह उक्ति सर्वांशतः उपयुक्त है, यह उनके क्रांतिधर्मी व्यक्तित्व को प्रखरता से उजागर करती है।
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Pages:39-43
How to cite this article:
डॉ. सुरेन्द्र कुमार "कबीर की सत्य शोधक जीवन दृष्टि के विविध आयाम". International Journal of Hindi Research, Vol 8, Issue 6, 2022, Pages 39-43
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