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VOL. 9, ISSUE 2 (2023)
‘छायावाद’ मूल्यांकन के नए परिप्रेक्ष्य
Authors
डॉ. स्नेहलता दास
Abstract
हिंदी साहित्य में छायावाद का उन्मेष एक काव्यान्दोलन आंदोलन के रूप में हुआ था। यह काव्यधारा भक्तिकाल के बाद हिंदी साहित्य की एक प्रमुख उपलब्धि है। यह दो दशकों तक हिंदी साहित्य का केंद्रबिंदु बना रहा। वैयक्तिक आत्मानुभूति, आलंकारिकता, प्रकृति चित्रण, प्रेम और सौंदर्य आदि छायावादी काव्य की प्रमुख विशेषताएं रही हैं। आज छायावाद को लगभग 100 वर्ष से अधिक हो चुके हैं। इन 100 वर्षों में छायावाद के नामकरण एवं उद्देश्य के अर्थापन को लेकर कई मतों की स्थापना हो चुकी है। समय-समय पर आलोचकों ने इन मतों का खंडन-मंडन भी किया है और यह प्रक्रिया आज भी जारी है।
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Pages:43-47
How to cite this article:
डॉ. स्नेहलता दास "‘छायावाद’ मूल्यांकन के नए परिप्रेक्ष्य". International Journal of Hindi Research, Vol 9, Issue 2, 2023, Pages 43-47
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