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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 9, ISSUE 3 (2023)
कविवर राम नरेश पाठक के साहित्य में लोक चेतना
Authors
शशांकधर शेखर, डॉ आनंद कुमार सिंह
Abstract
समकालीन हिन्दी साहित्य में लोक वेतना विषय से जुड़कर कुछ मुद्दे साहित्यकार और आस्वादकों के सामने एक चुनौती के रूप में उभर कर आते हैं। विज्ञान और तकनीकी के युग में क्या यह चेतना नष्टप्राय होती जा रही है? क्या वह धारा आज चुनौतियों का सामना कर रही है? क्या वह एक पूरक तत्व या विरोधी? क्या विश्वग्राम का वैश्विक पहलू हमारी लोकवेतना को झकझोर कर डालेगी या साथ लेकर चलेगी? क्या आज के युग में साहित्य की लोकचेतना केवल संग्रहालय की चीज बनकर रह गई है? क्या वह आस्था और जीवनमूल्य का अटूट हिस्सा है ? साहित्यकार उसको बिकाऊ चीज के रूप में मानते हैं या टिकाऊ? केवल दिमागी कसरत के रूप में लोकचेतना को साहित्य में जगह देती है तो उसमें ऊर्जा और उन्मेष की गुंजाइश न रहेगी।
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Pages:1-2
How to cite this article:
शशांकधर शेखर, डॉ आनंद कुमार सिंह "कविवर राम नरेश पाठक के साहित्य में लोक चेतना". International Journal of Hindi Research, Vol 9, Issue 3, 2023, Pages 1-2

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