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VOL. 9, ISSUE 3 (2023)
हिंदी साहित्य में स्वाधीनता आन्दोलन
Authors
डॉ. रोहित कुमार
Abstract
इस शोध पत्र के द्वारा हिंदी साहित्य में स्वतंत्रता आन्दोलन की चेतना के उत्पन्न होने के आरंभिक दौर को विश्लेषित करने का प्रयास किया गया है द्य आज हम 1857 ई. की क्रांति को किसी सिपाही विद्रोह या ग़दर के स्थान पर भारत का पहला स्वाधीनता संग्राम तथा अंग्रेजों के आत्याचारों के विरोध में एक लोकयुद्ध अधिक मानते हैं द्य एक अत्याचारी व्यवस्था और संस्कृति के विरुद्ध धार्मिक प्रतीकों तथा भावनाओं का प्रयोग भारतीय जनमानस को जगाने के लिए किया गया द्य इस क्रांति में हिन्दू और मुसलमान दोनों के मध्य अविश्वसनीय एक सूत्रता दिखाई देती है जिसे आगे चल कर गाँधी जी ने आगामी आन्दोलनों के लिए एक नया आयाम दिया द्य इस क्रांति की पृष्ठभूमि में सामाजिक-सांस्कृतिक यथार्थ के साथ-साथ आर्थिक वास्तविकता भी प्रमुख कारण रही द्य यह दौर भारतीय जनमानस में अस्मिता की गहरी लड़ाई को आरंभ करता है जहाँ भारत और भारतीयता की खोज के साथ-साथ राष्ट्रवाद और पुनर्जागरण हिंदी साहित्य के प्रमुख विषय बन जाते हैं ।
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Pages:28-30
How to cite this article:
डॉ. रोहित कुमार "हिंदी साहित्य में स्वाधीनता आन्दोलन". International Journal of Hindi Research, Vol 9, Issue 3, 2023, Pages 28-30
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