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VOL. 9, ISSUE 4 (2023)
साहित्य में ’उत्तर आधुनिकतावाद’ का स्वरूप
Authors
सुनील कुमार, डॉ. भरत कुमार
Abstract
साहित्य के क्षेत्र में उत्तर-आधुनिकता पूर्व-स्थापित सभी सर्वमान्य एवं शाष्वत आलोचना-प्रतिमानों (सिद्धांतों) का अस्वीकार और निषेध है। उत्तर-आधुनिकता ने साहित्य के क्षेत्र में निर्मित सभी पूर्व-महाख्यानों (वेद, उपनिषद, पुराण, रामायण, महाभारत, रामचरितमानस, बाईबिल, कुरान, कामायनी, गोदान एवं काव्यशास्त्र आदि) को खारिज कर दिया है। उत्तर-आधुनिकतावाद के लिए साहित्य के परंपरागत एवं आधुनिक दोनों प्रकार के ’रूप’ एवं ’वस्तु’ अर्थहीन हो गए हैं। ’उत्तर-आधुनिकतावाद‘ की मान्यता है कि साहित्य के पूर्व-स्थापित मानदंड, सिद्धांत और महावृत्तांत आभिजात्य वर्गों (भारत के संदर्भ में ब्राह्मणों) द्वारा निर्मित किए गए हैं जिनमें दलित-दमित, शोषित एवं उपेक्षित वर्गों के साहित्य को हीन समझकर बहिष्कृत किया गया है। इसलिए साहित्य के क्षेत्र में ’उत्तर-आधुनिकतावादी’ विचारधारा इन्हीं आभिजात्य-वर्गों के वर्चस्व एवं केंद्रवाद को चुनौती देकर दलित-दमित वर्गों के साहित्य का एक नया सौंदर्यशास्त्र, समाजशास्त्र और साहित्यशास्त्र रचना चाहती है। उत्तर-आधुनिकतावादी विचारधारा का मानना है कि आभिजात्य साहित्य का लेखक अपनी भाषा के माध्यम से कितना भी अपने पूर्वाग्रहों को ढकने की कोषिष करे, विखंडनवादी पाठ की रणनीति (विरचना या विनिर्मिति या अपने-अपने संदर्भों में ’पाठ’ को पढ़ने की रणनीति) उनकी दमितों के प्रति विराग-भावना को प्रकट कर ही देती है। इस प्रकार साहित्य में उत्तर-आधुनिकतावाद, पूर्व-स्थापित सिद्धांतों का विरोध करता हुआ अपने नए सिद्धांत निर्मित करना चाहता है। इसके लिए वह अनेक प्रकार की साहित्यिक चिंतन पद्धतियों यथा लेखक का अंत, साहित्य का अंत, महाख्यानों का अंत, विरचना अथवा विनिर्मिति, ‘पाठ-प्रविधि’, विमर्श-विश्लेषण, अस्मिता की खोज, सांस्कृतिक-अध्ययन अथवा ’नव-इतिहासवाद’, सबार्ल्टन-स्टडी (अधीनस्थों का अध्ययन), नारीवाद, दलितवाद और अश्वेतों का अध्ययन आदि का इस्तेमाल करता है। कुल मिलाकर साहित्य के क्षेत्र में ’उत्तर-आधुनिकतावाद‘ स्वयं द्वारा ईजाद की गई नवीन युक्तियों (प्रविधियों) के माध्यम से एक ’नव-लोकतांत्रिक’ अथवा ’अति-लोकतांत्रिक‘ स्थिति की स्थापना करने का सद्प्रयास है।
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Pages:56-62
How to cite this article:
सुनील कुमार, डॉ. भरत कुमार "साहित्य में ’उत्तर आधुनिकतावाद’ का स्वरूप". International Journal of Hindi Research, Vol 9, Issue 4, 2023, Pages 56-62
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