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VOL. 9, ISSUE 4 (2023)
भक्तिकालीन-साहित्य के मानवीय मूल्य
Authors
डॉ. महेन्द्र सिंह मीना
Abstract
मानवीय जीवन को केन्द्र में रखकर लिखा गया भावपूर्ण रचनात्मक लेखन साहित्य है। मनुष्य जीवन को समग्रता से आत्मसात करने और प्रतिष्ठापित में भक्तिकालीन कवियों का कोई शानी नहीं। हिन्दी साहित्य की विधिवत शुरूआत करने वाले भक्त कवि ही थे। भक्ति साहित्य आद्यांत मनुष्यता के साथ खड़ा दिखाई देता है। भक्ति आन्दोलन के बांग्लाभाषी संत कवि चंडीदास के शब्दों में- ‘सुनहु रे मानुष भाई। शाबार ऊपर मानुष सत्य, ताहार ऊपर नाहिं।’ तुलसीदास के राम को सबसे अधिक ’मनुज’ ही प्रिय हैं-‘सब मम प्रिय, सब मम उपजाए। सबसे अधिक, मनुज मोहि भाए।’ भक्तिकालीन काव्य/साहित्य सत्ता और समाज की परिधि पर खडे़ उस आदमी को जगह देती है, जिसे कविता के सहारे की सबसे ज्यादा जरूरत हैं। कविता उस दीन-हीन मानव का सहारा है, जिसे हर जगह से दुत्कारा जाता है।
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Pages:36-38
How to cite this article:
डॉ. महेन्द्र सिंह मीना "भक्तिकालीन-साहित्य के मानवीय मूल्य". International Journal of Hindi Research, Vol 9, Issue 4, 2023, Pages 36-38
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