ARCHIVES
VOL. 9, ISSUE 5 (2023)
मीराबाई के काव्य में कृष्ण भक्ति का स्वरुप
Authors
शिवानी
Abstract
भक्ति मनुष्य के आंतरिक मन की वह चेतना है, जो उसकी लघुता को विराटत्व में परिवर्तित करने की क्षमता रखती हैं। दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता हैं कि यह विराटत्व अर्थात् अलौकिक धरातल की ओर ले जाने में सक्षम है और तब मनुष्य अपने भीतर की रिक्तता को पूर्णता में बदल देने की कल्पना करता हैं। जो आत्मा और परमात्मा के मध्य एक तादात्म्य स्थापित करने का सूत्र बनता हैं। ईश्वर के प्रति आत्मा को समर्पित कर देने का नाम ही भक्ति हैं। भक्तिकाल में एक ऐसी ही भक्ति का स्वरुप हमे मीराबाई के काव्य में प्रदर्शित होता है। मीरा कृष्ण भक्तों में सर्वश्रेष्ठ स्थान रखती हैं। मीराबाई भारतीय जनमानस में आस्था व श्रद्धा का प्रतीक हैं। इनकी प्रासंगिकता इसी तथ्य को उजागर करती हैं कि अपनी प्रगतिशील व्यक्तित्व से जनमानस का मार्ग प्रशस्त करती हैं साथ ही भक्ति में प्रेममय होकर श्रीकृष्ण के प्रति अपनी अद्भुत अनन्य प्रेम भावना को व्यापक व उदात्त भाव प्रदान करती हैं। इस शोध आलेख में मीराबाई के काव्य में कृष्ण के स्वरुप को दर्शाया गया है।
Download
Pages:52-55
How to cite this article:
शिवानी "मीराबाई के काव्य में कृष्ण भक्ति का स्वरुप". International Journal of Hindi Research, Vol 9, Issue 5, 2023, Pages 52-55
Pdf, Certificate, Cover Page, Index Page, Editorial Page, Accept Letter
Please enter the email address corresponding to this article submission.

