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VOL. 9, ISSUE 5 (2023)
रहीम के काव्य में अभिव्यक्त नीति के विविध आयाम
Authors
ज्योति रानी
Abstract
हिंदी साहित्य का मध्य-युग भक्ति आंदोलन का युग था । जिसमें नैतिक मूल्यों और सामाजिक सद्भाव पर जोर दिया गया । मध्यकाल में समाज में एक नई चेतना जागृत हुई । इस काल के लोग आँख-मूँदकर विश्वास करने के स्थान पर तार्किकता को महत्व देने लगे । इस दौर के कवियों ने शासकों और सामंती व्यवस्था पर सवाल उठाए और लोक जीवन व परमतत्व में अपनी आस्था व्यक्त की । यह काव्य समाज को सन्मार्ग की ओर ले जाने तथा लोक कल्याण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रचा गया था । कबीर, रहीम, गिरधर कविराय जैसे कवियों ने दोहा, कुंडली और साखी जैसी शैलियों में नीतिपरक उपदेश दिये हैं । नैतिकता ही वह मापदंड है जिसके आधार पर मानव अपने कर्तव्यों का भली-प्रकार निर्वहन कर सकता है । नैतिकता का आश्रय ग्रहण करने पर ही मानव के भीतर उचित-अनुचित का विवेक जागृत होता है जिससे मानव के भीतर ईमानदारी, सत्यनिष्ठा, सहिष्णुता, समानता और सौहार्द की भावना विकसित होती हैं । आधुनिक युग भौतिकवादी युग है । भौतिकवादी वस्तुओं के अत्यधिक उपभोग ने मानव के आपसी रिश्तों और विवेक को अत्यंत प्रभावित किया है, बढ़ती सुख-सुविधाओं के परिणामस्वरुप मानव के भीतर नैतिक विचारों और कर्तव्यों का निरंतर अवमूल्यन होता जा रहा है जिससे वर्तमान समय में नीति काव्य की प्रासंगिकता और भी अधिक बढ़ गयी है ।
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Pages:49-51
How to cite this article:
ज्योति रानी "रहीम के काव्य में अभिव्यक्त नीति के विविध आयाम". International Journal of Hindi Research, Vol 9, Issue 5, 2023, Pages 49-51
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