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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 10, ISSUE 1 (2024)
प्रेमचंद की कहानियों में सामाजिक यथार्थ
Authors
लीलावती पटेल
Abstract
मुंशी प्रेमचंद हिंदी कथा-साहित्य के ऐसे महान् रचनाकार हैं जिन्होंने कहानी को केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रहने दिया, बल्कि उसे समाजिक जन-चेतना का संवाहक के रूप में उभारा है। उनकी कहानियाँ उन लोगों की आवाज हैं, जिनकी पीड़ा अक्सर साहित्य और समाज दोनों के द्वारा अनदेखी रह जाती थी। प्रेमचंद के लेखन का मूल स्वभाव यथार्थवादी है वे जीवन की कडवी सच्चाई- गरीबी, जातिवाद, और असंख्य समाज की असमानताओेेेेेें को पूरी निष्ठा के साथ प्रभावी ढ़ंग से सामने रखते हैं। उनकी कहानियों गोदान, कफ़न, ठाकुरों का कुऑ, निर्मला व अन्य में किसान, मजदूर, स्त्रियाँ, दलित, निम्नवर्ग, ग्रामीण समाज और शोषित वर्ग, शहरी जंीवन की कठिनाई व विभीषिका को उकेरता है। हर-एक कहानी के अन्दर न जाने कितनी जीवन के परिदृष्य दिखाई देते है। यह शोध-पत्र प्रेमचंद की कहानियों में मौजूद सामाजिक यथार्थ का विश्लेषण करता है और यह दिखाने का प्रयास करता है कि उनकी रचनाएँ आज भी सामाजिक और सांस्कृतिक संघर्ष को दिखाती है क्योंकि उनके द्वारा उठाए मुद्दें आज भी समाज में प्रासंगिक हैं।
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Pages:28-31
How to cite this article:
लीलावती पटेल "प्रेमचंद की कहानियों में सामाजिक यथार्थ". International Journal of Hindi Research, Vol 10, Issue 1, 2024, Pages 28-31

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प्रेमचंद की कहानियों में सामाजिक यथार्थ | International Journal of Hindi Research