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VOL. 10, ISSUE 1 (2024)
विभिन्न हठयोग ग्रंथों में योग की परिभाषा सामान्य अर्थ एवं योग का स्वरूप
Authors
वंदिता
Abstract
योग प्राचीन काल से ही भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग रहा है। जो हमें भारतीय परंपरा से विरासत के रूप में प्राप्त हुआ है।योग स्वस्थ जीवन जीने की एक कला है। जो मन व शरीर के मध्य सामंजस्य स्थापित करता है।सामान्यतः योग का अर्थ है जुड़ना। अर्थात दो तत्वों का मिलन ही योग कहलाता है। आत्मा का परमात्मा से जुड़ना ही योग है।
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Pages:6-7
How to cite this article:
वंदिता "विभिन्न हठयोग ग्रंथों में योग की परिभाषा सामान्य अर्थ एवं योग का स्वरूप". International Journal of Hindi Research, Vol 10, Issue 1, 2024, Pages 6-7
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