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VOL. 10, ISSUE 1 (2024)
अष्टांग योग के यम और नियम के पालन का मानव जीवन पर प्रभाव
Authors
ललित मोहन, उषा
Abstract
आज मानव इस मशीनी युग में सभी स्वास्थ्य सुविधाएं होते हुए भी शारीरिक, मानसिक व बौद्धिक रूप से स्वास्थ्य को लेकर चिंतित है। हम स्वास्थ्य की पूरी जानकारी रखते हुए भी स्वस्थ नहीं है। प्राचीन काल से लेकर अब तक स्वास्थ्य संस्कृति पर बहुत सारे शास्त्रकारों, रचनाकारों, साहित्यकारों, लेखकों ने अपने-अपने अनुभव का बखान किया है। इस संदर्भ में महर्षि पतंजलि का “पतंजल योगसूत्र” अपने में अद्वितीय है। जिसमें महर्षि पतंजलि ने मानसिक क्लेशों (अविद्या, अस्मिता, राग, द्वेष एवं अभिनिवेश) का निवारण के लिए योग सूत्रों का वर्णन किया। वही मन को संयमित और एक सदाचारी, नैतिक जीवन जीने के लिए अष्टांग योग में यम और नियम जैसे मुख्य अंगों का भी वर्णन किया है। जिसका अनुसरण कर व्यक्ति शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक अवस्थाओं से ऊपर उठकर राजयोग अर्थात जीवन में अध्यात्म की उच्च अवस्था (मोक्ष) को प्राप्त कर सकता है।
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Pages:3-5
How to cite this article:
ललित मोहन, उषा "अष्टांग योग के यम और नियम के पालन का मानव जीवन पर प्रभाव". International Journal of Hindi Research, Vol 10, Issue 1, 2024, Pages 3-5
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