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VOL. 10, ISSUE 2 (2024)
हरियाणवी लोकजीवन की अपरिचित विधाओं का सैद्धांतिक अवलोकन
Authors
महासिंह पूनिया
Abstract
हरियाणवी लोकजीवन और लोक साहित्य का परस्पर गहरा संबंध है। लोकविनोदी प्रवृति हरियाणा के लोगों की खास विशेषता है, लोक में रचित साहित्य ही लोक साहित्य है। लोक साहित्य का प्रकीर्ण स्वरूप लोक विनोद है। लोक विनोद की अनेक विधाएं लोक जीवन में मोतियों की तरह बिखरी हुई पड़ी हैं। इन विधाओं को अभी तक सैद्धांतिक स्वरूप नहीं दिया गया है। इस शोध पत्र में 20 से अधिक लोक साहित्यिक विधाओं को सैद्धांतिक स्वरूप प्रदान किया गया है। इन विधाओं में लोक विनोद, जनवार्ता, हाजिरजवाबी, बुझावल, मखौल, ब्योंक, नकल, मसखरी, गप्प, गपोड़, गडंग़, मिसल, मनोविनोद, बतंगड़, मजाक, चीड़-चबोड़, हंसी ठठ्ठा, फरड़े, अंघाई, ठोला-ठसका, चुटकला आदि शामिल हैं।
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Pages:31-34
How to cite this article:
महासिंह पूनिया "हरियाणवी लोकजीवन की अपरिचित विधाओं का सैद्धांतिक अवलोकन". International Journal of Hindi Research, Vol 10, Issue 2, 2024, Pages 31-34
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