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VOL. 10, ISSUE 3 (2024)
‘गिलिगडु’ उपन्यास में चित्रित वृद्ध विमर्श
Authors
श्री महेश बापुराव चव्हाण
Abstract
आधुनिक युग साहित्य की दृष्टि से काफी संपन्न रहा है। इस युग में साहित्य के क्षेत्र में काफी बदलाव देखे गये हैं। जैसे परिवर्तन प्रकृति का नियम है वैसे हि कालानुरूप परिवर्तन साहित्य का नियम बन गया है। जब जब काल परिवर्तन होता रहा तब तब साहित्य भी परिवर्तीत होता रहा है। केवल मनोरंजन अथवा राजा महाराजाओं की प्रशंसा करना यह उद्देश्य रखनेवाला साहित्य प्राचीन मध्ययुगीन काल से आधुनिक काल तक आते-आते साहित्य मनुष्य जीवन का अविभाज्य अंग बन गया। साहित्य में मनुष्य के जीवन से जुड़े हुए विभिन्न पहलू को देखा जाने लगा और साहित्य का उद्देश्य समाज में व्याप्त सभी प्रकार के पहलुओं को उजागर करना बन गया। इसमें मनुष्य जीवन की पीड़ा, संत्रास, कुंठा आदि को व्यक्त किया गया है। साहित्य का सीधा संबंध मनुष्य जीवन से है इसी अर्थ में साहित्य मनुष्य के जीवन का दर्पण कहलाता है। मनुष्य का समग्र जीवन चित्रण साहित्य का उद्देश्य है।
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Pages:39-40
How to cite this article:
श्री महेश बापुराव चव्हाण "‘गिलिगडु’ उपन्यास में चित्रित वृद्ध विमर्श". International Journal of Hindi Research, Vol 10, Issue 3, 2024, Pages 39-40
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