ARCHIVES
VOL. 10, ISSUE 3 (2024)
उच्च-मध्य्वार्गीय जीवन की विसंगतिपूर्ण संवेदन का आख्यानः अंतिम अरण्य
Authors
श्रद्धा श्रीवास्तव, डॉ. अमरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव
Abstract
आज के समय में जीवन तेजी से आगे बढ़ रहा है। वैश्वीकरण एवं विकास की तेज रफ्तार ने हमारे समाज और परिवार को व्यापक स्तर पर प्रभावित किया है। बीसवीं सदी का अन्तिम दशक और इक्कीसवीं सदी के दो दशकों ने व्यक्ति को और अकेला कर दिया है। इस द्रष्टि से निर्मल वर्मा द्वारा रचित ष्अंतिम अरण्यष् एक विशिष्ट उपन्यास है। इस उपन्यास में निर्मल वर्मा ने जीवन की आपाधापी में उभर रही संवेदनहीनता एवं उदासी को बहुत ही गहरे रूप में कथा के फलक पर उकेरा है। एक ऐसा कैनवस जो रंगहीन चित्र हमारे समक्ष प्रस्तुत कर रहा है। ष्अंतिम अरण्यष् अन्तिम दशक का एक ऐसा दस्तावेज है जिसमे आने वाले समय का सच देखने को मिलता है।
Download
Pages:56-58
How to cite this article:
श्रद्धा श्रीवास्तव, डॉ. अमरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव "उच्च-मध्य्वार्गीय जीवन की विसंगतिपूर्ण संवेदन का आख्यानः अंतिम अरण्य". International Journal of Hindi Research, Vol 10, Issue 3, 2024, Pages 56-58
Pdf, Certificate, Cover Page, Index Page, Editorial Page, Accept Letter
Please enter the email address corresponding to this article submission.

