ARCHIVES
VOL. 10, ISSUE 3 (2024)
कनिः विखंडनवादी तेवर और समस्यात्मक क्वीर प्रतिनिधान
Authors
जयकृष्णन एम
Abstract
प्रतिनिधान ;तमचतमेमदजंजपवदद्ध समाज और संस्कृति में प्रचलित “डोमिनेंटिंग” रंग, लिंग वर्ग, नस्ल, जाति आदि के आधिपत्य का खंडन करने में या “सुब्वेर्ट” ;ेनइअमतजद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रतिनिधान एक साहित्यिक मुद्दा के रूप में स्वीकृत होने के वर्षों पहले से भारतीय साहित्य में क्वीर प्रतिनिधान विद्यमान रहा है। क्वीर यानि लिंग पहचान या लैंगिकता से संबंधित पारंपरिक विचारों में फिट नहीं बैठने वाले लोग, सदियों से साहित्य का हिस्सा रहे हैं, चाहे उन रचनाओं के प्रतिनिधान की राजनितिक स्वर 21वीं सदी की क्वीर राजनीति से अलग हो। मलयालम साहित्य में क्वीर प्रतिनिधान वाली कहानियाँ कविता की तुलना से कम हैं। लेकिन हिंदी साहित्य से तुलना करने पर मलयालम की क्वीर कहानियाँ साहित्यिक और राजनैतिक दृष्टि से समृद्ध हैं। मलयालम लेखिका सी.एस चन्द्रिका की कहानी ‘कनि’ प्रासंगिक क्वीर मुद्दों को उकेरने वाली सशक्त कहानी है। साथ ही साथ प्रस्तुत कहानी स्त्रीवादी दृष्टिकोण से पारंपरिक विषमलैंगिक विवाह व्यवस्था के प्रति लेखिका का विद्रोह को भी रेखांकित करती है। यह शोध पत्र ‘कनि’ कहानी में अभिव्यक्त विखंडनवादी तेवर, क्वीर प्रतिनिधान, इसके समस्याग्रस्त पहलू आदि के अध्ययन-विश्लेषण करने का प्रयास करता है।
Download
Pages:59-60
How to cite this article:
जयकृष्णन एम "कनिः विखंडनवादी तेवर और समस्यात्मक क्वीर प्रतिनिधान". International Journal of Hindi Research, Vol 10, Issue 3, 2024, Pages 59-60
Pdf, Certificate, Cover Page, Index Page, Editorial Page, Accept Letter
Please enter the email address corresponding to this article submission.

