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VOL. 10, ISSUE 4 (2024)
सगुण भक्ति और सांगीतिक स्वरुप
Authors
डॉ. दिलंका रसांगी नानायक्कार
Abstract
सगुण भक्ति भारतीय भक्ति परंपरा की वह धारा है जिसमें ईश्वर को साकार, सगुण और मूर्त रूप में आराध्य माना गया है। इसमें भगवान के विभिन्न रूपों जैसे राम, कृष्ण, शिव, देवी आदि की पूजा की जाती है। इस परंपरा के केंद्र में भक्ति और प्रेम का भाव है। सगुण भक्ति संतों और भक्त कवियों ने अपने भजनों, पदों और गीतों के माध्यम से इसे जन-जन तक पहुंचाया। इस सगुन धरा में सांगीतिक स्वरूप अत्यंत महत्वपूर्ण है। भक्ति आंदोलन के दौरान संगीत का उपयोग भक्ति की भावना को व्यक्त करने और उसे जनमानस तक पहुंचाने के लिए किया गया। इसमें मुख्य रूप से भजन, कीर्तन, और दास्य भक्ति से जुड़े गीत गाए जाते हैं।
अतः यह विधित होता है कि सगुण भक्ति और उसका सांगीतिक स्वरूप भक्त और ईश्वर के बीच प्रेम, समर्पण और एकात्मता को प्रकट करता है। संगीत के माध्यम से यह परंपरा भारतीय समाज में अध्यात्म और सौहार्द का प्रचार करती रही है।
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Pages:48-52
How to cite this article:
डॉ. दिलंका रसांगी नानायक्कार "सगुण भक्ति और सांगीतिक स्वरुप". International Journal of Hindi Research, Vol 10, Issue 4, 2024, Pages 48-52
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