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VOL. 10, ISSUE 4 (2024)
सूरदास का महाकाव्य: कला- पक्ष की दृष्टि में
Authors
वर्षा महिवाल
Abstract
संत सूरदास की गिनती सोलहवीं शताब्दी के महान भक्त, कवि और संतों में होती है इनके काव्यों को महाकाव्यों के रूप में जाना जाता है जिन्हें भाव पक्ष और कला पक्ष के रूप में विभाजित किया गया है। इनके महाकाव्य को कला पक्ष की दृष्टि में यहाँ उल्लेखित किया गया है, जिसमें काव्य की सरलता, प्रवाह, संगीतमयता, रचनात्मकता, भावुकता, भक्ति एवं अलंकारों के प्रयोग का वर्णन किया गया है। भावों की अभिव्यक्ति को देखते हुए इनके काव्यों में कृष्ण भक्ति को साधारण जन की जुबान में समा जाने वाली लय की मिठास घोलने वाला दर्शाया गया है।
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Pages:65-67
How to cite this article:
वर्षा महिवाल "सूरदास का महाकाव्य: कला- पक्ष की दृष्टि में". International Journal of Hindi Research, Vol 10, Issue 4, 2024, Pages 65-67
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