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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 11, ISSUE 1 (2025)
आधुनिक हिंदी और सिंहली कविताओं में परिलक्षित नारी-जीवन की यथा स्थिति का तुलनात्मक अध्ययनः सुमित्रानंदन पंत और महगम सेकर की कविताओं के आधार पर
Authors
डी. पी. सिनालि नदीपमा पतिरण, डॉ. निलंति राजपक्ष
Abstract
मानव समाज का सदस्य होने के कारण समाज के साथ मानव का संबंध घनिष्ठ होता है। समाज में निरंतर घटित होते रहने वाली घटनाओं से प्रेरित होकर मानव साहित्य में समाज की यथा स्थिति का चित्रण करने लगा। हिंदी एवं सिंहली पद्य साहित्य में समाज का यथा स्वभाव कई स्वरूपों में परिलक्षित हुआ। शोषित वर्ग, पूँजीपति वर्ग एवं मध्य वर्ग के लोगों से संबंधित समस्याएँ, सामाजिक विष्वासों की यथा स्थिति एवं नरी से संबंधित समस्याओं का भी वर्णन सुमित्रानंदन पंत एवं महगम सेकर की कविताओं में विद्यमान होती हैं। नारी जीवन के यथा स्वभाव के आधार पर समाज की वास्तविक स्थिति को उभारने के लिए दोनों कवियों ने जो प्रयास किया है, उसपर तुलनात्मक अध्ययन करना इस शोध का प्रमुख लक्ष्य है। इस शोध की समस्या यह है कि नारी जीवन की यथा स्थिति को दर्शाते समय कौन-सी साम्यविषमताएँ दोनों कवियों के काव्य रचनाओं में विद्यमान होती हैं? यह शोध गुणात्मक शोध प्रविधि के आगमनात्मक दृ-ष्टिकोण के आधार पर किया गया और आँकड़े विश्लेषण करते समय पाठ विश्लेषण प्रविधि का प्रयोग किया गया। प्राथमिक स्रोतों के रूप में सुमित्रानंदन पंत एवं महगम सेकर के काव्य ग्रंथों का और द्वितीय स्रोतों के रूप में इस शोध के विषय से संबंधित अन्य विचार ग्रंथ, शोध आलेख एवं अंतरजाल का प्रयोग किया गया। इस शोध के आधार पर यह निष्कर्ष किया जा सकता है कि नारी जीवन की यथा स्थिति को प्रस्तुत करते समय दोनों कवियों के कविताओं में समानताओं के साथ-साथ कुछ असमानताएँ विद्यमान होती हैं।
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Pages:23-28
How to cite this article:
डी. पी. सिनालि नदीपमा पतिरण, डॉ. निलंति राजपक्ष "आधुनिक हिंदी और सिंहली कविताओं में परिलक्षित नारी-जीवन की यथा स्थिति का तुलनात्मक अध्ययनः सुमित्रानंदन पंत और महगम सेकर की कविताओं के आधार पर". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 1, 2025, Pages 23-28
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