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VOL. 11, ISSUE 1 (2025)
वर्तमान में लघुकथा का परिवर्तित स्वरूप
Authors
राज किशन परमार, डॉ. मंजु चतुर्वेदी
Abstract
आज हिन्दी गद्य साहित्य के अंतर्गत ’लघुकथा’ पूर्णतया प्रतिष्ठित हो चुकी विधा है। लघुकथा के बीज रूप से लेकर वृक्ष बन जाने तक के सफर में अनेक लघुकथाकारों का अपूर्व योगदान रहा है। समय के साथ-साथ कथाकारों ने इसके रूप, आकार, विषयों व भाषा शैली में बदलाव किया। आज आधुनिक समय में ’लघुकथा’ नये रूप में समय के साथ चलने को तैयार खड़ी है। पहले लघुकथा धर्म, शिक्षा, नीति आदि की बात करती थी, वहीं आज लघुकथा यथार्थ को प्रकट करने का कार्य कर रही है। ष्आधुनिक युग में जीवन इतना बहुमुखी, दुरूह, जटिल, सामाजिक, राजनीतिक एवं विशाल हो गया है कि परिवर्तित संदर्भ एवं परिप्रेक्ष्य में और युग परिवेशगत परिस्थितियों के दबाव में मानवीय सम्बन्धों में उल्लेखनीय बदलाव आया है।1
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Pages:41-45
How to cite this article:
राज किशन परमार, डॉ. मंजु चतुर्वेदी "वर्तमान में लघुकथा का परिवर्तित स्वरूप". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 1, 2025, Pages 41-45
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