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VOL. 11, ISSUE 1 (2025)
हठयोग साधना में बन्धत्रय: एक अध्ययन
Authors
सीमा सिंह
Abstract
हठयोग साधना में बन्ध एक क्रिया है बन्ध ऊर्जा को प्रवाहित करने और जमा करने की क्रिया है। यह एक आन्तरिक मुद्रा है। बन्ध ऊर्जा के प्रवाह को निर्देशित करने के लिए एक मुहर बनाता है, जिसका उद्देश्य नाड़ी शुद्धि और प्राण वायु को स्थिरता के माध्यम से आध्यात्मिक ऊर्जा (कुण्डलिनी) को जगाने और आध्यात्मिक शक्तियों की सिद्धि के लिए आवश्यक है। गोरक्षशतक में महायोगी गोरखनाथ ने बन्धत्रय उड्डियान बन्ध, जालन्धर बन्ध और मूलबन्ध के अभ्यास को मानव जीवन में परम फलदायी स्वीकारा है।
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Pages:71-72
How to cite this article:
सीमा सिंह "हठयोग साधना में बन्धत्रय: एक अध्ययन". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 1, 2025, Pages 71-72
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