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VOL. 11, ISSUE 1 (2025)
नई शिक्षा नीति और हिन्दी की स्थिति
Authors
डॉ. श्रीमति के चन्द्रा
Abstract
भारत के शिक्षा शास्त्री और सरकार द्वारा गठित विभिन्न आयोग बार-बार इस विषय को स्पष्ट करते हैं कि सभी स्तरों पर शिक्षा का माध्यम मातृभाषा ही होनी चाहिए। विद्यालयों में हिन्दी भाषा का अध्ययन अलग दृअलग स्तरों पर भिन्न दृभिन्न रूपों में होता है। जैसे - मातृभाषा, द्वितीय भाषा एवं तृतीय भाषा। स्वतन्त्रता से पूर्व प्रदेशों में माध्यमिक शिक्षा के विद्यालयों में मातृभाषा के माध्यम से पढ़ाई होती थी। केवल कुछ चुने हुए विद्यालयों में ही अंग्रेजी वैकल्पिक माध्यम के रूप में या फिर पूरे माध्यम के रूप में होती थी। विष्वविद्यालयों में ही अंग्रेजी माध्यम थी। परंतु उस समय आज की तुलना में विद्यार्थी बहुत कम होते थे। हमारे स्वतन्त्रता प्राप्त करते-करते यूरोप, अमेरिका और जापान में विज्ञान एवं टेकनालजी की अप्रत्याशिव उन्नती हुई। प्रथम एवं दूसरे विष्वयुद्ध तक एमएनवी डायनामाइट से परमाणु विस्फोटक तक पहुँच गया। तब से बड़े पैमाने पर विविध क्षेत्रीय एवं तकनीकी ज्ञान का विकास होता चला आ रहा है। राष्ट्रनिर्माण की नींव मजबूत करने के लिए हिन्दी को राजभाषा का पद दिया गया था।
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Pages:73-74
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डॉ. श्रीमति के चन्द्रा "नई शिक्षा नीति और हिन्दी की स्थिति". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 1, 2025, Pages 73-74
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