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VOL. 11, ISSUE 1 (2025)
हठयोग साधना में प्रयुक्त षट्कर्म की वर्तमान प्रासंगिकता
Authors
सीमा सिंह, प्रतिभा सिंह
Abstract
हठयोग साधना में छः शुद्धिकरण अभ्यासों का वर्णन किया गया है, जिसे षट्कर्म कहते हैं, यह एक बहुत ही सटीक और व्यवस्थित विज्ञान है। षट्कर्म का अर्थ है- ‘छह’ और कर्म का अर्थ है- ‘कार्य’ षटकर्म में शुद्धिकरण अभ्यासों के छह समूह शामिल हैं। हठयोग परम्परा में चार प्रमुख ग्रन्थ घेरण्ड संहिता, शिव संहिता, हठयोग प्रदीपिका और हठरत्नावली है। हठयोग में सर्वप्रथम षट्कर्म के अभ्यास की चर्चा की गयी है। हठयोग में षट्कर्म का उद्देश्य दो प्रमुख प्राणिक प्रवाह इड्ा और पिंगला अर्थात् सूर्य और चन्द्र नाड़ी का शोधन कर उनके बीच सामंजस्य स्थापित करना है, जिससे शारीरिक और मानसिक शुद्धि और सन्तुलन प्राप्त होता है। षट्क्रिया में धौति, वस्ति, नेति, नौलि, त्राटक और कपालभाति सम्मिलित हैं। यह शरीर के त्रिदोष वात, पित्त, कफ का शोधन कर उनको सन्तुलित करता है जिससे शरीर निरोगी, मन शान्त, हृदय शुद्ध हो जाता है। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में षट्कर्म मानव जीवन के लिए अतिमहत्त्वपूर्ण है।
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Pages:87-89
How to cite this article:
सीमा सिंह, प्रतिभा सिंह "हठयोग साधना में प्रयुक्त षट्कर्म की वर्तमान प्रासंगिकता". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 1, 2025, Pages 87-89
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