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VOL. 11, ISSUE 2 (2025)
भक्ति काव्य में भारतीय ज्ञान परंपरा
Authors
डॉ. धर्मेंद्र कुमार शर्मा
Abstract
भारतीय ज्ञान परंपरा एक दिव्य प्रकाशपुंज के समान है, जिसकी आभा भक्ति काव्य में निखरकर लोकचेतना को आलोकित करती है। वेदों की गंभीरता, उपनिषदों की रहस्यात्मकता और पुराणों की सांस्कृतिक गरिमा जब संत कवियों की वाणी में प्रवाहित हुई, तो भक्ति काव्य प्रेम, भक्ति और ज्ञान का सजीव संगम बन गया। कबीर के दोहों में आत्मज्ञान की ज्वाला प्रज्वलित होती है, तुलसीदास की चौपाइयों में धर्म और नीति का सुगंधित समर्पण मिलता है, सूरदास के पदों में भक्ति की माधुरी रसधारा बनकर बहती है, और मीरा के भजनों में प्रेम का निर्मल स्रोत अनवरत प्रवाहित होता है। इस काव्यधारा ने ज्ञान को केवल ग्रंथों तक सीमित न रखकर लोकभाषाओं में उतारा, जिससे समाज में समरसता, आध्यात्मिकता और नैतिकता का दिव्य आलोक प्रस्फुटित हुआ। इस शोध-पत्र में भक्ति काव्य में भारतीय ज्ञान परंपरा के विविध आयामों का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
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Pages:1-2
How to cite this article:
डॉ. धर्मेंद्र कुमार शर्मा "भक्ति काव्य में भारतीय ज्ञान परंपरा". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 2, 2025, Pages 1-2
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