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VOL. 11, ISSUE 2 (2025)
भारतीय पर्वों में समाहित सांस्कृतिक चेतना: विद्यानिवास मिश्र के विचारों का मूल्यांकन
Authors
सुजाता कुमारी, एस वी एस एस नारायण राजू
Abstract
भारतीय पर्वों में सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक चेतना का गहरा समन्वय देखने को मिलता है। विद्यानिवास मिश्र अपने निबंधों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को एक आध्यात्मिक जागरण के रूप में देखते हैं, जो सत्य, धर्म और प्रेम के पुनर्स्थापन का प्रतीक है। होली को वे सरलता और सामूहिक उल्लास के माध्यम से बुराई पर विजय प्राप्त करने का पर्व मानते हैं। बसंत पंचमी और कुंभ जैसे पर्व प्रकृति, समाज और धार्मिक सहिष्णुता के प्रतीक हैं। उनके अनुसार, भारतीय पर्व न केवल धार्मिक अनुष्ठान हैं, बल्कि ये समाज में एकता, प्रेम और मानवता की भावना को भी प्रबल करते हैं। वे आधुनिक समय में पर्वों के लुप्त होते सार पर चिंता जताते हैं, लेकिन उनका मानना है कि ये पर्व भारतीय संस्कृति की गहरी जड़ों से जुड़े हुए हैं, जो समय के साथ और सुदृढ़ होते जा रहे हैं। उनके विचार इन पर्वों को केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि एक गहरे आंतरिक और सामूहिक अनुभव के रूप में देखते हैं।
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Pages:40-42
How to cite this article:
सुजाता कुमारी, एस वी एस एस नारायण राजू "भारतीय पर्वों में समाहित सांस्कृतिक चेतना: विद्यानिवास मिश्र के विचारों का मूल्यांकन". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 2, 2025, Pages 40-42
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