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VOL. 11, ISSUE 2 (2025)
सामाजिक परिप्रेक्ष्य में: दिनकर की विवाह की मुसीबतें
Authors
डॉ. आरती कुमारी
Abstract
प्रतिभा सम्पन्न व्यक्तित्व के धनी साहित्यकार रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हिन्दी साहित्य जगत में यथा नाम तथा गुण जैसी कहावत को चरितार्थ करते हुए साहित्याकाश में सूर्य के समान तेजस्वी रचनाकार हैं। दिनकर ने पद्य के साथ-साथ गद्य में भी समभ्यस्त रूप से अपनी लेखनी चलाई है। ‘विवाह की मुसीबतें’ निबंध संग्रह के माध्यम से इन्होंने भारतीय समाज में व्याप्त अनेकानेक समस्याओं को दृष्टिगत किया है। आधुनिक परिप्रेक्ष्य में विवेच्य संग्रह उपयुक्त है। इसके माध्यम से प्रेम, विवाह, काम, नैतिकता, शिक्षा, लोकतंत्र, धर्म,विज्ञान, उपासना प्रभृति जैसे विषयों को सामाजिक दृष्टि से सैद्धांतिकी अवधारणाओं के रूप में विवेचित करने का प्रयास किया गया है।
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Pages:53-55
How to cite this article:
डॉ. आरती कुमारी "सामाजिक परिप्रेक्ष्य में: दिनकर की विवाह की मुसीबतें". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 2, 2025, Pages 53-55
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