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VOL. 11, ISSUE 2 (2025)
वर्तमान संदर्भ में 'गोदान' उपन्यास की प्रासंगिकता
Authors
राजू गौड़
Abstract
मुंशी प्रेमचंद द्वारा रचित ‘गोदान’ उपन्यास भारतीय ग्रामीण समाज की आर्थिक, सामाजिक और नैतिक वास्तविकताओं का यथार्थ चित्र प्रस्तुत करता है। उपन्यास का मुख्य पात्र होरी एक कृषक है, जो जीवन भर अपने सपनों और सामाजिक कर्तव्यों के बीच संघर्ष करता है। उपन्यास में किसानों की गरीबी, जातिगत शोषण, भ्रष्ट धार्मिक व्यवस्था, महिलाओं की स्थिति और वर्ग-संघर्ष जैसी समस्याओं को प्रभावशाली ढंग से उकेरा गया है। आज के वर्तमान समाज में भी ये सभी मुद्दे — जैसे किसानों की आत्महत्याएँ, आर्थिक विषमता, जातीय भेदभाव, नारी उत्पीड़न और नैतिक पतन — ज्यों के त्यों उपस्थित हैं। शहरीकरण और तकनीकी प्रगति के बावजूद, ग्रामीण भारत अब भी ‘गोदान’ के यथार्थ से जूझ रहा है। इस दृष्टि से ‘गोदान’ केवल एक साहित्यिक कृति नहीं, बल्कि एक सामाजिक दस्तावेज है, जिसकी प्रासंगिकता आज भी उतनी ही सजीव और प्रेरणादायक है।
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Pages:85-86
How to cite this article:
राजू गौड़ "वर्तमान संदर्भ में 'गोदान' उपन्यास की प्रासंगिकता". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 2, 2025, Pages 85-86
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