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VOL. 11, ISSUE 2 (2025)
छायावादी काव्य में वैदिकालीन पर्यावरणीय चिंतन की अवधारणा
Authors
सुनीति त्यागी, डॉ. पूनम शर्मा
Abstract
हमारे चारो ओर जो आवरण है जिसे हम अनुभव करते है तथा जिनके साथ हमारी अंतः क्रिया होती है साथ ही जिन पर मानव और अन्य जीवों का जीवन निर्भर होता है पर्यावरण कहलाता है। है। छायावादी काव्य की रचनाएं प्रकृति के समीप हैं जिनमें प्रकृति का विलक्षण प्रभाव और प्रकट करने की तीव्र भावना देखने को मिलती है। छायावाद हिन्दी कविता आधुनिकता के युग में पुरानी कविता के विरोध में निकला हुआ एक विशेष भावानात्मक दृष्टिकाण एवंम् विशेष दार्शनिक अनुभूति और एक विशेष प्रकार की शैली है जिसके काव्य में प्रकृति का मानवीयकरण करके उसे एक नये रूप में प्रस्तुत किया गया है।
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Pages:91-93
How to cite this article:
सुनीति त्यागी, डॉ. पूनम शर्मा "छायावादी काव्य में वैदिकालीन पर्यावरणीय चिंतन की अवधारणा". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 2, 2025, Pages 91-93
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