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VOL. 11, ISSUE 2 (2025)
शिक्षा की जड़ें मातृभाषा में: राष्ट्रीय शिक्षा नीति का क्रांतिकारी दृष्टिकोण
Authors
पारस यादव
Abstract
यह लेख राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में मातृभाषा की भूमिका को स्पष्ट करते हुए यह बताता है कि प्रारंभिक शिक्षा मातृभाषा में देने से बच्चों का संज्ञानात्मक, भाषाई, सामाजिक और भावनात्मक विकास अधिक प्रभावी ढंग से होता है। लेख में बताया गया है कि मातृभाषा केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि सोच, अनुभव, पहचान और संस्कृति की संवाहिका है। नीति के अनुसार कक्षा 5 (या संभव हो तो 8) तक शिक्षा मातृभाषा, स्थानीय या क्षेत्रीय भाषा में दी जानी चाहिए, जिससे बच्चे सहज रूप से सीख सकें। लेखक ने इस पर भी बल दिया है कि यह निर्णय विशेष रूप से ग्रामीण, आदिवासी और बहुभाषी समुदायों के बच्चों के लिए समावेशी शिक्षा सुनिश्चित करता है। लेख में मातृभाषा आधारित शिक्षा के लाभ, क्रियान्वयन की चुनौतियाँ जैसे शिक्षक की कमी, संसाधनों की उपलब्धता और पालकों की मानसिकता तथा उनके समाधान भी प्रस्तुत किए गए हैं। NISHTHA जैसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षकों को इस दिशा में सक्षम बनाने के प्रयासों का उल्लेख भी किया गया है। अंततः लेख यह स्थापित करता है कि मातृभाषा आधारित शिक्षा आत्मनिर्भर, समावेशी और सांस्कृतिक रूप से सशक्त भारत की आधारशिला बन सकती है।
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Pages:97-100
How to cite this article:
पारस यादव "शिक्षा की जड़ें मातृभाषा में: राष्ट्रीय शिक्षा नीति का क्रांतिकारी दृष्टिकोण". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 2, 2025, Pages 97-100
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