ARCHIVES
VOL. 11, ISSUE 3 (2025)
प्रगतिवादी कविता: सामाजिक अन्याय की आलोचना
Authors
Vinay Kumar
Abstract
यह शोध आलेख हिंदी साहित्य में प्रगतिवादी कविता की सामाजिक भूमिका
को रेखांकित करता है। प्रगतिवाद एक साहित्यिक आंदोलन के साथ-साथ एक सामाजिक चेतना भी
है, जिसकी शुरुआत 1936 में लखनऊ में प्रेमचंद की अध्यक्षता में प्रगतिशील लेखक संघ
की स्थापना के साथ मानी जाती है। इस धारा का मूल उद्देश्य समाज में व्याप्त शोषण, असमानता,
अन्याय, पूंजीवाद और पितृसत्ता का विरोध करना तथा दलित, गरीब, मजदूर, किसान और नारी
वर्ग की पीड़ा को स्वर देना है।
Download
Pages:24-26
How to cite this article:
Vinay Kumar "प्रगतिवादी कविता: सामाजिक अन्याय की आलोचना". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 3, 2025, Pages 24-26
Pdf, Certificate, Cover Page, Index Page, Editorial Page, Accept Letter
Please enter the email address corresponding to this article submission.

