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VOL. 11, ISSUE 3 (2025)
चरण सिंह पथिक की कहानियों में स्त्री दुर्दश का चित्रण
Authors
अशोक कुमार, डॉ रामकृष्ण शर्मा
Abstract
यह शोध पत्र चरण सिंह पथिक की कहानियों के स्त्री पात्र की दुर्दषा का चित्रण करता है। विषेषतः ग्रामीण नारी की मानसिक, सामाजिक व आर्थिक स्थिति का यथार्थ विष्लेषण करता है। ग्रामीण महिलाओं के साथ होने वाले अत्याचार एवं दुर्दषा का चित्रण है। ग्रामीण नारी अबला, निसक्त, असहाय रूप में नजर आती है। साथ ही घरेलू कार्यों तथा खेत-खलियान के कार्यों एवं परिवार के देख-रेख में अपना पूरा जीवन खफा़ देती है जैसे- ग्रामीण बालिका के लिए उच्च शिक्षा प्राप्ति में परिवार की रूढ़ीवादी मानसिकता बाधा उत्पन्न करती है। अकेली नारी तथा विधवा नारी बाहर तथा घर के अन्दर कहीं भी सुरक्षित नही है। उसके यौवन पर कुदृष्टि परिवार के सदस्यों की भी रहती है। पुत्रवधु के साथ होने वाले शोषण, अत्याचार एवं अन्याय में सास भी लिप्त है। वहीं ग्रामीण नारी के सषक्त क्रान्तिकारी संघर्षषील रूप को भी चित्रित किया गया है तथा इसमें नारी के दया, प्रेम, ममता, त्याग तथा परोपकार की भावना को भी दर्षाया गया है।
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Pages:72-74
How to cite this article:
अशोक कुमार, डॉ रामकृष्ण शर्मा "चरण सिंह पथिक की कहानियों में स्त्री दुर्दश का चित्रण". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 3, 2025, Pages 72-74
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