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VOL. 11, ISSUE 3 (2025)
कन्नड़ साहित्य में बसवन्ना का योगदान
Authors
बालकृष्ण सी
Abstract
बसवन्ना (1131–1196 ई.) कन्नड़ साहित्य और भारतीय समाज-सुधार
परंपरा के इतिहास में अद्वितीय स्थान रखते हैं। उनका योगदान केवल काव्य तक सीमित
नहीं था, बल्कि दार्शनिक, सामाजिक
और धार्मिक स्तर पर भी था। वचन साहित्य के माध्यम से
उन्होंने कन्नड़ भाषा को संस्कृतनिष्ठ अभिजात साहित्य से मुक्त कर आमजन की भाषा
में साहित्य रचा। उनका सिद्धांत “कायकवे कैलास” (श्रम ही कैलास है) श्रम की
गरिमा और समानता की ओर संकेत करता है। अनुभव मंडप की स्थापना को विश्व
का पहला लोकतांत्रिक “लोक-संसद” माना जाता है, जिसने विचार-विमर्श और संवाद
की परंपरा को जन्म दिया। इस लेख में बसवन्ना की समाज सुधारक दृष्टि, वचन साहित्य की विशेषताएँ और कन्नड़ साहित्य एवं संस्कृति पर उनके
दूरगामी प्रभाव का अध्ययन किया गया है।
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Pages:84-85
How to cite this article:
बालकृष्ण सी "कन्नड़ साहित्य में बसवन्ना का योगदान". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 3, 2025, Pages 84-85
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