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VOL. 11, ISSUE 4 (2025)
सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला': छायावादी चेतना और क्रांतिकारी मानस के कवि
Authors
प्रभात मिश्रा
Abstract
हिन्दी साहित्य के छायावादी युग में सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' एक ऐसी विलक्षण प्रतिभा के रूप में उभरे जिन्होंने परम्परा और आधुनिकता, रहस्यवाद और यथार्थवाद, भक्ति और विद्रोह के बीच एक सुन्दर सामंजस्य स्थापित किया। उनकी काव्य-सृष्टि में जहाँ एक ओर छायावादी कोमलता और प्रकृति के माधुर्य का चित्रण है, वहीं दूसरी ओर सामाजिक विषमता और शोषण के प्रति तीव्र आक्रोश और क्रांति का स्वर भी मुखरित हुआ है। यह अद्वितीय समन्वय ही निराला को उनके समकालीन कवियों से एक विशिष्ट पहचान प्रदान करता है।
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Pages:148-149
How to cite this article:
प्रभात मिश्रा "सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला': छायावादी चेतना और क्रांतिकारी मानस के कवि". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 4, 2025, Pages 148-149
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