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VOL. 11, ISSUE 4 (2025)
अमृतलाल नागर के उपन्यासों में धार्मिक युग बोध
Authors
डॉ. जे सेन्दामरै
Abstract
प्राचीन भारत में धर्म की विषालता उसकी भावनात्मक एकता का रुप, विभिन्न धर्मों के संधर्ष और मान्यताए, धर्म से प्रेरित देष की राजनीति और समाज का रूप नागर के सभी उपन्यासों में द्रष्टय हैं। नागर के उपन्यासों में धर्म सम्बन्धी जो व्याख्याएं दिए हैं, वें लोककल्याणकारी रही है। धर्म की विकृति पर न केवल कठोर प्रहार करते हैं बल्कि उसे जागरूप चेतना द्वारा कल्याणकारी कार्यो से युक्त कर स्वस्थ दृष्टिकोण प्रदान करना चाहते है। हिन्दू धर्म के विभिन्न मत मतांतरों का समन्वय करके उसे एक प्रकार से पुष्ट रूप में प्रतिष्ठित करने का प्रयत्न नागरजी ने अपने उपन्यासों में किया है।
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Pages:178-179
How to cite this article:
डॉ. जे सेन्दामरै "अमृतलाल नागर के उपन्यासों में धार्मिक युग बोध". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 4, 2025, Pages 178-179
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