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VOL. 12, ISSUE 1 (2026)
भारतीय ज्ञान-बोध और आधुनिक हिन्दी निबंध
Authors
डॉ. सुजाता कुमारी
Abstract
प्रस्तुत लेख आधुनिक हिन्दी निबंधों में भारतीय ज्ञान-परंपरा के स्वरूप, महत्व और समकालीन प्रासंगिकता का विश्लेषण करता है। भारतीय संस्कृति में ‘ज्ञान’ को केवल बौद्धिक अभ्यास नहीं, बल्कि जीवन-दृष्टि, नैतिक चेतना और आत्मिक उन्नयन का साधन माना गया है। इस संदर्भ में आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी, रामधारी सिंह दिनकर, विद्यानिवास मिश्र और कुबेरनाथ राय जैसे प्रमुख हिन्दी निबंधकारों के विचारों का अध्ययन किया गया है। लेख में यह स्पष्ट किया गया है कि इन निबंधकारों ने वैदिक, उपनिषदिक और पौराणिक ज्ञान-परंपरा को आधुनिक सामाजिक, सांस्कृतिक और वैचारिक संदर्भों से जोड़ते हुए प्रस्तुत किया है। उनका लेखन यह सिद्ध करता है कि भारतीय ज्ञान केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य को दिशा देने वाली जीवंत शक्ति है। निष्कर्षतः, आधुनिक हिन्दी निबंधों में ज्ञान-परंपरा परंपरा और आधुनिकता के बीच एक सार्थक संवाद स्थापित करती है तथा भारतीय चिंतन की निरंतरता और प्रासंगिकता को रेखांकित करती है।
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Pages:53-54
How to cite this article:
डॉ. सुजाता कुमारी "भारतीय ज्ञान-बोध और आधुनिक हिन्दी निबंध". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 1, 2026, Pages 53-54
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