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VOL. 12, ISSUE 1 (2026)
विकसित भारत के लिए क्यों जरूरी है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन
Authors
धन राज
Abstract
यह शोध पत्र राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विकसित भारत के निर्माण में भूमिका का विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। 1925 में स्थापित यह संगठन भारतीय समाज में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता के संवर्धन में कार्यरत है। शोध में संघ की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, वैचारिक आधार, कार्यप्रणाली और बहुआयामी योगदान का परीक्षण किया गया है। संघ का शैक्षणिक योगदान, सेवा कार्य, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तीकरण और युवा विकास विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। संघ की दैनिक शाखाएं लाखों स्वयंसेवकों को चरित्र निर्माण और राष्ट्र सेवा के लिए प्रशिक्षित करती हैं। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सामाजिक संगठनों की सक्रिय भूमिका अनिवार्य है। संघ का विकेंद्रीकृत संगठन, जमीनी उपस्थिति, निःस्वार्थ सेवा की परंपरा और सांस्कृतिक-राष्ट्रवादी दृष्टिकोण इसे राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण बनाता है। शोध निष्कर्ष बताता है कि संघ जैसे व्यापक सामाजिक संगठन विकसित भारत के निर्माण में सरकारी प्रयासों के पूरक के रूप में आवश्यक भूमिका निभा सकते हैं।
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Pages:88-90
How to cite this article:
धन राज "विकसित भारत के लिए क्यों जरूरी है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 1, 2026, Pages 88-90
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