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VOL. 12, ISSUE 1 (2026)
भारतीय दर्शन का स्वरूप और उसकी विभिन्न प्रणालियाँ
Authors
सुशील विठठल भोंग
Abstract
आधुनिक युग में प्राचीन भारतीय दर्शन का अनन्यसाधारण महत्त्व है। भारतीय दर्शन का प्रतिबिंब भारत की नई शिक्षा नीति छम्च् 2020 में भी दिखाई देता है। इसी बात को ध्यान में रखकर इस अभ्यास के अंतर्गत भारतीय दर्शन का स्वरूप, विषय वस्तु, शाखाएँ, विधियाँ इनका संक्षिप्त विवेचन प्रस्तुत लेख में किया गया है।
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Pages:95-97
How to cite this article:
सुशील विठठल भोंग "भारतीय दर्शन का स्वरूप और उसकी विभिन्न प्रणालियाँ". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 1, 2026, Pages 95-97
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