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VOL. 12, ISSUE 1 (2026)
मोहनदास नैमिशराय की कहानियों में चित्रित दलितों की समस्याएं
Authors
विनय चंद्र पांडेय
Abstract
मोहनदास नैमिशराय हिंदी दलित साहित्य के उन प्रमुख रचनाकारों में अग्रणी हैं, जिनकी रचनाएँ वर्णवाद, ब्राह्मणवाद, मनुवाद व्यवस्था के दुर्ग को धवस्त कर दलित, पिछड़े और अधिकारवंचित समाज के लिए मुखर आवाज उठाती हैं। उनकी कहानियाँ दलित जीवन के कटु सत्य और समस्याओं को प्रस्तुत करती हैं जिनमें दलितों की पीड़ा, यातना, शोषण और उत्पीड़न प्रतिबिंबित होता है। नैमिशराय ने दलित होने के नाते जिस तिरष्कार, घृणा और संघर्ष को भोगा उसी का चित्रण अपनी कहानियों में भी किया। तत्कालीन समाज के गर्भ में पोषित और फैल रही सामाजिक, जातिवादी, वर्णवादी समस्याओं के मध्य फँसे एकलव्य, शंबूक और कर्ण जैसे असंख्य दलित पात्रों का यथार्थ वर्णन नैमिशराय की कहानियों में मिलता है। उनकी कहानियाँ पाठकों को श्स्वांतरू सुखायश् और श्बहुजन हिताय बहुजन सुखायश् की अवधारणा पर सोचने को विवश करती है। इस शोध पत्र में हम ‘मोहनदास नैमिशराय की कहानियों में चित्रित दलितों की समस्याएं’ का विश्लेषण करेंगे और उन्हें भारतीय सामाजिक जीवन, न्याय व्यवस्था, दलित चेतना और दलित विमर्श के परिपेक्ष्य में समझेंगे। मोहनदास नैमिशराय की कहानियाँ ऐश्वर्यवादी और काल्पनिक तथ्यों को नकार कर सामाजिक परिदृश्य पर गहरी छाप छोड़ते हुए समता, बन्धुता और स्वंत्रता जैसे शब्दों की अर्थवृत्ता साबित करती है।
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Pages:170-172
How to cite this article:
विनय चंद्र पांडेय
"मोहनदास नैमिशराय की कहानियों में चित्रित दलितों की समस्याएं". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 1, 2026, Pages 170-172
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