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VOL. 12, ISSUE 1 (2026)
डिजिटल मानविकी के विशेष संदर्भ में अवधी भाषा का भविष्य
Authors
तनु सिंह
Abstract
यह शोध पत्र इक्कीसवीं सदी की सूचना क्रांति के दौर में डिजिटल मानविकी के सिद्धांतों और अवधी भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन के अंतर्संबंधों का गहन विश्लेषण करता है। शोध का मुख्य उद्देश्य इस विषय की जाँच या समझ विकसित करना है, कि किस प्रकार कंप्यूटेशनल विधियाँ, जैसे- प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (NLP) और कॉर्प्स लिंग्विस्टिक्स, अवधी जैसी समृद्ध किंतु तकनीकी रूप से उपेक्षित भाषा को भविष्य की 'स्मार्ट भाषा' के रूप में स्थापित कर सकती हैं।
अध्ययन रेखांकित करता है कि अवधी केवल एक क्षेत्रीय बोली नहीं, बल्कि जायसी और तुलसीदास की महान साहित्यिक विरासत की संवाहिका है। वर्तमान में यह भाषा डिजिटल विभाजक और मानक डेटा के अभाव जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। शोध के निष्कर्ष दर्शाते हैं, कि अवधी का भविष्य इसके डिजिटल अनुकूलन पर निर्भर है। दुर्लभ पांडुलिपियों का उच्च-स्तरीय डिजिटलीकरण, मौखिक लोक-साहित्य (कज़री, सोहर आदि) का ऑडियो-विजुअल आर्काइविंग और एआई (AI) मॉडल्स के प्रशिक्षण हेतु एक व्यापक 'समानांतर कॉर्प्स' का निर्माण अनिवार्य है।
अंततः, यह शोध पत्र प्रस्तावित करता है कि यदि भाषाविद् और तकनीकी विशेषज्ञ मिलकर अवधी के व्याकरणिक ढाँचे को एल्गोरिदम में परिवर्तित कर सकें, तो अवधी मशीनी अनुवाद और वैश्विक डिजिटल पटल पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा पाएगी। यह कार्य न केवल भाषायी अस्मिता को बचाए रखने के लिए आवश्यक है, बल्कि वैश्विक स्तर पर ज्ञान के लोकतंत्रीकरण की दिशा में भी एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है।
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Pages:194-197
How to cite this article:
तनु सिंह "डिजिटल मानविकी के विशेष संदर्भ में अवधी भाषा का भविष्य". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 1, 2026, Pages 194-197
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